एक लड़की ’गुलाम’ बनने के लिए जन्म नहीं लेती"
इस 17 वर्षीय लड़की ने नोबल शांति पुरुस्कार जीता है!

पाकिस्तान की मलाला युसुफ़जाई ने इतिहास बना दिया जब 17 वर्ष की आयु में नोबल शान्ति पुरुस्कार जीतने वाली सबसे कम आयु की प्रतिभागी बनी। नोबल समिति ने कहा कि मलाला ने उदाहरण से दिखा दिया कि छोटी आयु के लोग भी अपनी परिस्थितियों की बेहतरी में योगदान कर सकते हैं। उन्होंने उसका वर्णन लड़कियों के शिक्षा के आधिकार के लिए प्रमुख प्रवक्ता के रूप में किया।

मलाला महज 11 वर्ष की थी जब उसने 2008 में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए, लड़की की शिक्षा के अधिकारों के लिए बोलना शुरु कर दिया था: "तालिबान की मेरी शिक्षा के आधारभूत अधिकार को छीनने की हिम्मत कैसे हुई?"

उसके शब्द अविस्मरणीय थे, न केवल उसकी स्पष्टता और विद्वता के लिए बल्कि उसकी निडरता के लिए भी। अब, मलाला को शांत करने के असफल प्रयासों के बावजूद, उसकी निडरता और सशक्त और दृढ़ हो गयी है।

"यह मुझे आगे जाने और स्वयं पर विश्वास करने के लिए - यह जानने के लिए वहाँ लोग हैं जो इस आंदोलन में हमारा समर्थन कर रहे हैं एक प्रोत्साहन है। हम सब एकजुट हैं।"

मलाला ने अपने पिता को ’उनके सहयोग से सारा अंतर आया’ कहते हुए जीत के लिए धन्यवाद दिया: मैं अपने पिता की मेरे पर न कतरने; मुझे उड़ने देने और मेरे लक्ष्यों को प्राप्त करने देने के लिए शुक्रगुजार हूँ। यह दर्शाने के लिए कि एक लड़की ’गुलाम’ बनने के लिए नहीं होती। एक लड़की के पास उसके जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति होती है।"

मलाला के पिता जियाउद्दीन युसुफ़जाई ने कहा कि वह आशा करते हैं कि घोषणा सभी जगह लड़कियों के अधिकारों को सहायता करेंगी। जब मलाला की जीत की घोषणा हुई इंटरनेट पर सेलीब्रिटी, राजनेता और वैश्विक नेताओं की उनकी बधाई ट्वीट के साथ एक पागलपन छा गया। पाकिस्तान की स्वात घाटी में, जहाँ मलाला बड़ी हुई उत्सव मे फ़ूट पडी जब जिस विद्यालय जहाँ मलाला को गोली मारी गई थी, कक्षाओं से बाहर निकल पडे और सडकों पर नाचने लगे।

मलाला की ’लडकियों की शिक्षा’ की लडाई से जुडिये: Girl Declaration पढ़िए, विश्वास कीजिए और इसे जिएँ - और अपने मित्रों को ऐसा ही करने के लिए कहिये!

20 March 2015
Sajan द्वारा अनुवाद किया गया