इन 10 युक्तियों से लड़कियों को मदद मिलती है…
उनके नेतृत्व की ताकत को बढ़ाने के लिए!

  1. कक्षा में बोलना

अपने हाथ उठाना, उस स्थिति में भी अगर आप जवाब को लेकर सुनिश्चित न हों। आपके मन में जो बात है उसे संपादित करने से बचना और गलत होने को लेकर चिंता करने का प्रयास न करना। बोलने का मतलब यह नहीं होता है कि उचित जवाब ही प्राप्त होगा। इससे आपको खुद से सोचने, दूसरों से बहस करने और किसी विचार से युद्ध करने का अनुभव मिलता है – ये सभी ऐसी कुशलताएँ हैं, जिनका उपयोग आप अपने जीवन के हर क्षेत्र में करेंगे।

  1. बोलने से पहले माफ़ी माँगना बंद करना

लड़कियाँ अक्सर अपने विचार को माफ़ी माँगते हुए पेश करती हैं (“मैं नहीं जानती कि ये सही है या गलत, लेकिन...”)। उन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें, जो शायद आपको कक्षा में बोलते समय और छोटा बनाती हैं, जैसे कि अपने बालों से खेलना, कुछ अपने “तरीके की” चीज़ें बोलना, यह पूछना कि आपने अभी-अभी जो कहा है क्या वह “मायने रखता” है या इतना धीरे बोलना कि किसी को भी आपकी बातें न सुनाई दें।

  1. खुद को चुनौती देना

जब हम विफलता या आलोचना को लेकर परेशान होते हैं, तो उस समय इस बात की संभावना अधिक रहती है कि हमें ऐसे अनुभव प्राप्त हों कि हम जानते हैं कि हम नियंत्रित कर सकते हैं। लेकिन सुरक्षित खेलने का मतलब यह है कि आपको किसी बाधा पर जीत हासिल करने और खुद को यह अहसास दिलाने की खुशी प्राप्त नहीं होगी कि आप इतनी बहादुर हैं कि आप इसे आज़मा सकती हैं। खुद को आराम की दुनिया से बाहर निकालना। उस खेल में भाग लेना जिसे आपने कभी न खेला हो। ऐसी कक्षा में नामांकन कराना, जिसकी उम्मीद किसी ने भी न की हो। कूटबद्ध करने का तरीका जानना। या थोड़ा जोखिम उठाना, जैसे कि किसी ऐसे व्यक्ति को अपना परिचय देना, जिसे आप नहीं जानती हों।

  1. मदद माँगना सबसे सफल लोग इसे अपने खुद के तरीके से नहीं करते हैं। इसकी बजाय, वे इस प्रकार सलाहकारों की मदद लेते हैं: अनुभवी, बुद्धिमान लोग जिन्हें पर्याप्त जानकारी हो और उनकी मदद करें। आपको जिन चीज़ों को लेकर जुनून है, उनके बारे में उन अध्यापकों, कोच या दूसरे बड़े लोगों जिनकी आप तारीफ़ करती हैं, उनसे कुछ पूछने से न डरें। उनसे यह पूछें कि जब वे आपकी उम्र के थे तो वे क्या बनना चाहते थे। किसको पता है कि एक दिन वे आपके सपनों को भी साकार करने में आपकी मदद कर सकते हैं!

  2. हर एक व्यक्ति के काम को न करना

जब किसी सामूहिक प्रोजेक्ट का कोई सदस्य अच्छी तरह से (या बिल्कुल भी) योगदान नहीं देता है, तो यह आसान रहता है कि आप उसका काम खुद ही कर दें – और इस बारे में चुप रह जाएँ। उस काम को अपने हाथों में लेने पर उस समय तो उस पर नियंत्रण पाया जा सकता है, लेकिन इससे आप क्रोधित रह सकती हैं, अधिक वर्कलोड ले सकती हैं और किसी भी प्रकार का श्रेय नहीं ले सकतीं। जब आपकी सहपाठी को यह लगे कि वह अपना कार्य समाप्त कर देगी, तो सीधे अपनी सहपाठी से पूछकर समस्या का समाधान करें। अगर आपको स्पष्ट प्रतिक्रिया न मिले, तो उसे बिल्कुल साफ़तौर पर सीधे बता दें कि आपको क्या चाहिए या किसी अध्यापक से मदद लें।

  1. मित्रवत बातें करना

हमने शायद हमेशा किसी एक बात पर या किसी अन्य चीज़ पर गपशप की हुई है, लेकिन अगर आप मित्रों से बात करने की बजाय हमेशा अपने मित्रों के बारे में ही बातें करती हैं, तो आप उन लोगों से बात करने के अवसर से चूक जाती हैं, जो आपके लिए सबसे अधिक मायने रखते हैं। आप क्या महसूस करती है, इस बारे में किसी को बताने में समर्थ होने से आपको अपने जीवन के हर क्षेत्र में मदद मिलेगी, चाहे आप किसी भी तरीके से अपना रुझान क्षेत्र चुनें। और हो सकता है कि आप परेशानी वाली चीज़ों को बताने के लिए संदेश भेजने या सामाजिक मीडिया पर निर्भर रहने से बचें। उस समय यह संचार को अधिक आसान बना सकता है, लेकिन आपके सामने अभी आमने-सामने बात न करने की कीमत बाद में चुकाने का जोखिम रहेगा। बिल्कुल सीधे बात करना डरावना हो सकता है, लेकिन ऐसा सावधानी से करें और आप अपने आसपास के लोगों का सम्मान और विश्वास हासिल करेंगी।

  1. अपने भीतर की आवाज़ पर भरोसा करना

हम सभी के मन में एक आवाज़ बजती रहती है। ये छोटी-छोटी बातें हो सकती हैं, जैसे “काश, मेरा काम बन जाए” या बड़ी-बड़ी बातें हो सकती हैं, जैसे “काश, मेरा मित्र मुझसे मेरे ग्रेड के बारे में पूछना बंद कर दे।” ये आपके मन की आवाज़ है। यह आपसे कहती है कि वास्तव में आप क्या सोचते हैं, आपकी ज़रूरत क्या है और आप क्या चाहते हैं। जब आप इस बात को लेकर परेशान हों कि लोग क्या सोच सकते हैं, तो उस आवाज़ को सुनना बंद करना आसान होता है। जितना अधिक हो सके, उतना अधिक उससे जुड़े रहें। यह आपके अंदर का कंपास है। अगर आप उस आवाज़ को अभी साझा नहीं कर सकते, तो एक ऐसी डायरी रखें जिस पर आप उसे लिख पाएँ – हमेशा उन लोगों की तलाश में रहें, जो उसे सुनना चाहते हों।

  1. दुनिया बदलना

दुनिया को बदलने के लिए आपको उसे चलाने की ज़रूरत नहीं है। अंदर कौन सी चीज़ है जो आपको प्रकाशित करती है? ऐसी कौन सी चीज़ है जो आपको उग्र बनाती है? किसी क्लब से जुड़ें या कोई सामुदायिक संगठन शुरू करें। यहाँ तक कि कक्षा प्रतिनिधि के लिए खुद को मत दें। किसी अभियान को चलाने से आपको बोलने और खुद को एक नायक के रूप में पेश करने का शानदार अभ्यास मिलता है। चाहे आप कुछ भी निर्णय लें, लेकिन निम्न बातें याद रखें: आपकी आवाज़ की तरह किसी की भी आवाज़ नहीं है, लेकिन हम उसे तब तक नहीं सुनेंगे, जब तक कि आप उसका इस्तेमाल न करें।

  1. निम्न बातें याद रखें: बोलना हमेशा आसान नहीं होता है, लेकिन बोलना उपयोगी रहता है

आप एक ऐसी दुनिया में बड़ी हो रही हैं, जो अभी भी इस बात को लेकर दुविधा में है कि वह लड़कियों को कितना मज़बूत बनाना चाहती है। अपेक्षा की जाती है कि लड़कियाँ आत्मविश्वासी बनें लेकिन अच्छी रहें, महत्वाकांक्षी बनें, लेकिन स्वार्थी न बनें, सफलता प्राप्त करें लेकिन अभिमानी न बनें। ये नियम भ्रामक और अनुचित हो सकते हैं – इसका मतलब यह है कि जब आप बोलेंगी तो यह बात सबको अच्छी नहीं लगने वाली है। वास्तव में, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा कि आप कितने अच्छे तरीके से कुछ कहती हैं, ऐसा भी कोई हो सकता है, जिसे यह लगे कि आप गलत काम कर रही हैं। उस स्थिति में भी अपनी आवाज़ पर भरोसा करें, जब ऐसा लगे कि दुनिया भरोसा नहीं कर रही और उन मित्रों एवं परिजनों के नज़दीक रहें, जो आपकी ताकत की सराहना करते हैं।

  1. अभ्यास!

आप स्कूलवर्क, खेलकूद और संगीत जैसी चीज़ों का अभ्यास करते-करते बड़ी हुई हैं। लेकिन कोई भी आपको बोलने, जोखिम उठाने या अपनी ज़रूरत की चीज़ के बारे में कहने का अभ्यास करने के लिए नहीं कहता है। इनके साथ क्या होता है? जीवन में ऐसी कोई भी चीज़ नहीं है जिसके लिए अभ्यास की ज़रूरत न पड़े और बोलना भी इसका अपवाद नहीं है। उस ताकत पर काम करें! पहली बार यह डरावना लग सकता है, लेकिन यह आसान हो जाता है।

युक्तियाँ, सौजन्य से http://banbossy.com

20 March 2015
Sajan द्वारा अनुवाद किया गया